राज्यसभा में 3 तलाक़ बिल हुआ पास, सरकार की बड़ी जीत

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सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत में, 3 तालक बिल ने आज राज्यसभा की बाधा को अपने रास्ते से दूर कर दिया है. लंबी बहस के बाद और वोटिंग के ज़रिये 3 तालक बिल राज्यसभा में पारित किया गया.

इसी के साथ मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक अब राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पास उनकी सहमति के लिए जाएगा. एक बार जब 3 तालक बिल पर राष्ट्रपति की सहमति बन जाएगी तो यह फरवरी महीने में अंतिम रूप से संशोधित किए गए 3 तालक अध्यादेश का स्थान ले लेगा.

बिल की खास बातें

एक बार में 3 तलाक गैरकानूनी और अवैध होगा

ऐसा करने वाले पति को होगी तीन साल के कारावास की सजा

तीन तलाक देना गैरजमानती और संज्ञेय अपराध होगा

पीड़िता को मिलेगा गुजारा भत्ता का अधिकार

मजिस्ट्रेट करेंगे इस मुद्दे पर अंतिम फैसला

जम्मू-कश्मीर को छोड़ कर पूरे देश में लागू होना है

राज्यसभा में बिल के समर्थन में 99, जबकि विरोध में 84 वोट पड़े. इससे पहले विपक्ष की बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग भी सदन में गिर गई. वोटिंग के दौरान बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के पक्ष में 84, जबकि विरोध में 100 वोट पड़े. राज्यसभा से 3 तलाक बिल पास होना मोदी सरकार की बड़ी जीत मानी जा रही है.

पहले भी राज्यसभा में बहुत हंगामा हुआ है.

मुस्लिम महिलाओं को 3 तलाक की प्रथा से मुक्ति दिलाने के मकसद से मंगलवार को राज्यसभा में पेश विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए विभिन्न दलों के सदस्यों ने इसे अपराध की श्रेणी में डालने के प्रावधान पर आपत्ति जताई. साथ ही साथ कहा कि, इससे पूरा परिवार प्रभावित होगा.

हालांकि सत्ता पक्ष ने कहा कि, इस विधेयक को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए साथ ही कहा कि कई इस्लामी देशों ने पहले ही इस प्रथा पर रोक लगा दी है.

यह विधेयक लोकसभा में पिछले सप्ताह ही पारित हुआ था. विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य अमी याज्ञनिक ने कहा कि, महिलाओं को धर्म के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए.

उन्होंने सवाल किया कि सभी महिलाओं के प्रति क्यों नहीं चिंता की जा रही है? उन्होंने कहा कि समाज के सिर्फ एक ही तबके की महिलाओं को समस्या का सामना नहीं करना पड़ता, यह समस्या सिर्फ एक कौम में ही नहीं है.

उन्होंने कहा कि वह विधेयक का समर्थन करती हैं, लेकिन इसे अपराध की श्रेणी में डालना उचित नहीं है. याज्ञनिक ने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय ने पहले ही इसे अवैध ठहरा दिया तो फिर विधेयक लाने की क्या जरूरत थी.

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