उन्नाव रेप पीड़िता एक्सीडेंट: गवाहों की सड़क हादसे में मौत

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वैसे तो ऐसा सिर्फ फिल्मों में देखने को मिलता है, लेकिन यूपी के कई हाईप्रोफाइल मामले में गवाहों की मौत सड़क हादसे में हो चुकी है. जिसके बाद सवाल खड़े होते हैं कि क्या एक्सीडेंट गवाहों को एलिमिनेट करने का सबसे आसान रास्ता है.

उन्नाव रेप पीड़िता और उसके परिजनों के साथ रायबरेली में हुए सड़क दुर्घटना को एक साजिश बताया जा रहा है. पीड़िता के परिजन और तमाम विपक्षी दलों का आरोप है कि यह महज एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि हत्या की साजिश थी. इस सड़क दुर्घटना में उन्नाव रेप केस की 1 गवाह की मौत हो गई, जबकि पीड़िता की स्थिति गंभीर बनी हुई है. वैसे तो ऐसा सिर्फ फिल्मों में देखने को मिलता है, लेकिन यूपी के कई हाईप्रोफाइल मामले में गवाहों की मौत सड़क हादसे में हो चुकी है. जिसके बाद सवाल खड़े होते हैं कि क्या एक्सीडेंट गवाहों को एलिमिनेट (मारने) करने का सबसे आसान रास्ता है.

दरअसल यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा क्योंकि यह पहला मौका नहीं है जब किसी पीड़ित और केस जुड़े अहम गवाह हादसे के शिकार हुए हैं. पूर्व में भी कई बार ऐसा हो चुका है.

कुंडा कांड में गवाह की सड़क हादसे में मौत

मायावती शासनकाल में कुंडा कांड काफी सुर्ख़ियों में रहा था. शासन के निर्देश पर यूपी पुलिस ने कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप उर्फ राजा भैया पर कार्रवाई की थी. यह कार्रवाई सीओ कुंडा राम शिरोमणि पांडेय ने की थी. वो कई मामले में गवाह भी थे. इलाहाबाद (प्रयागराज) में 8 साल पहले हुए एक सड़क हादसे में उनकी संदिग्ध मौत हो गई.

मधुमिता हत्याकांड

लखनऊ के बहुचर्चित मधुमिता हत्याकांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ था. केस की विवेचना (जांच) कर रहे पुलिस इंस्पेक्टर यज्ञदत्त दीक्षित की कानपुर में रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी. इस मामले में इंस्पेक्टर को सीबीआई ने आरोपी बनाया था और उसकी गवाही भी होनी थी.

आसाराम रेप केस

अब इसे इत्तेफाक तो नहीं कह सकते. रेप और हत्या के आरोप में जेल बंद आसाराम बापू के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ. शाहजहांपुर के कई गवाहों की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है.

उन्नाव रेप कांड में भी उठ रहा सवाल

ये तो बात है हाईप्रोफाइल मामलों की जिनमें प्रमुख गवाहों की मौत सड़क हादसे में हुई. इसके अलावा ऐसे तमाम मामले भी हैं जिनकी ख़बर मीडिया तक पहुंच नहीं पाती. उन्नाव रेप कांड में पीड़िता और उसके परिजनों का एक्सीडेंट इसी संदेह को बल दे रहा है कि क्या केस को ख़त्म करने और दबाव बनाने के लिए तो नहीं किया गया. हालांकि पुलिस का दावा है कि वो सभी एंगल से मामले की जांच कर रही है. विपक्ष के हमले से सरकार भी बैकफुट पर है और उसने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी है.

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